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Why this novel : I was just looking into my old database of books and didn't find this amazing novel which I read in my graduation days. I searched it everywhere but couldn't get a download link.:(. so I am buying it from flipkart in Rs. 86/-.
This book was the first superhit novel by Bhagwati charan verma. I became fan of him after reading this.
"What is sin?"पाप क्या है?
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चित्रलेखा न केवल भगवतीचरण वर्मा को एक उपन्यासकार के रूप में प्रतिष्ठा दिलाने वाला पहला उपन्यास है बल्कि हिन्दी के उन विरले उपन्यासों में भी गणनीय है, जिनकी लोकप्रियता बराबर काल की सीमा को लाँघती रही है।
चित्रलेखा की कथा पाप और पुण्य की समस्या पर आधारित है-पाप क्या है? उसका निवास कहाँ है ? -इन प्रश्नों का उत्तर खोजने के लिए महाप्रभु रत्नांबर के दो शिष्य, श्वेतांक और विशालदेव, क्रमश: सामंत बीजगुप्त और योगी कुमारगिरि की शरण में जाते हैं। और उनके निष्कर्षों पर महाप्रभु रत्नांबर की टिप्पणी है, ‘‘संसार में पाप कुछ भी नहीं है, यह केवल मनुष्य के दृष्टिकोण की विषमता का दूसरा नाम है। हम न पाप करते हैं और न पुण्य करते हैं, हम केवल वह करते हैं जो हमें करना पड़ता है।’’
Starting of the novel:
श्वेतांक ने पूछा-‘‘और पाप !’’
महाप्रभु रत्नांबर मानो एक गहरी निद्रा से चौंक उठे। उन्होंने श्वेतांक की ओर एक बार बड़े ध्यान से देखा। ‘‘पाप ? बड़ा कठिन प्रश्न है वत्स ! पर साथ ही बड़ा स्वाभाविक ! तुम पूछते हो पाप क्या है!’’ इसके बाद रत्नांबर ने कुछ देर तक कोलाहल से भरे पाटलिपुत्र की ओर, जिसके गगनचुंबन करने का दम भरनेवाले ऊंचे-ऊंचे प्रासाद अरुणिमा के धुंधले प्रकाश में अब भी दिखलाई दे रहे थे, देखा-‘‘हां, पाप की परिभाषा करने की मैंने भी कई बार चेष्टा की है, पर सदा असफल रहा हूं। पाप क्या है, और उसका निवास कहां है, यह एक बड़ी कठिन समस्या है, जिसको आज तक नहीं सुलझा सका हूं। अविकल परिश्रम करने के बाद, अनुभव के सागर में उतराने के बाद भी जिस समस्या को नहीं हल कर सका हूं, उसे किस प्रकार तुमको समझा दूं ?’’
रत्नांबर ने रुककर फिर कहा-‘‘पर श्वेतांक, यदि तुम पाप को जानना ही चाहते हो, तो तुम्हें संसार में ढूँढ़ना पड़ेगा। इसके लिए यदि तैयार हो, तो संभव है, पाप का पता लगा सको।’’
श्वेतांक ने रत्नांबर के सामने मस्तक नवाकर कहा-‘‘मैं प्रस्तुत हूं।’’ Read more here
There are two movies based upon this novel released in 1941 and 1964. Here you can see this movie.
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